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एस्तेर 5:3,4,8,14

3 फेर राजा नै उसतै पूछ्या, "हे एस्तेर राणी, तन्‍नै के चाहिये? अर तू के माँगणा चाहवै सै? माँग अर तन्‍नै आध्धा राज्य ताहीं दिया जावैगा।" 4 एस्तेर नै कह्या, "जै राजा नै मंजुर हो, तो आज हामान नै गैल लेकै उस भोज म्ह आवै, जो मन्‍नै राजा कै खात्तर त्यार करया सै।" 8 के जै राजा मेरे तै खुश सै अर मेरा निवेदन सुणणा अर जो वरदान मै माँगू वोए देणा राजा नै मंजुर हो, तो राजा अर हामान कल उस भोज म्ह आवै जिस ताहीं मै उनकै खात्तर करुँगी, अर कल मै राजा नै बताऊँगी के मन्‍नै के चाहिए।" 14 उसकी घरआळी जेरेश अर उसके सारे दोस्तां नै उसतै कह्या, "पचास हाथ ऊँच्‍चा फाँसी का एक खम्बा बणाया जावै, अर सबेरै राजा तै कहिये, के उसपै मोर्दकै लटका दिया जावै; फेर राजा कै गैल खुशी तै भोज म्ह जाईये।" इस बात तै खुश होकै हामान नै उस्से तरियां का फाँसी का एक खम्बा बणवाया।

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