पूरीम नाम के त्यौहार का ठहराया जाणा
1 अदार नाम के बारहवें महिन्ने के तेरहवें दिन म्ह, जिस दिन राजा का हुकम अर नियम पूरे होण पै थे, अर यहूदियाँ के वो दुश्मन उनपै हावी होण की ऊमीद करया करदे, पर इसकै विपरीत यहूदी अपणे दुश्मनां पै हावी होए; उस दिन, 2 यहूदी लोग राजा क्षयर्ष के सारे प्रान्तां म्ह अपणे-अपणे नगर म्ह कठ्ठे होए, ताके जो उनके नुकसान करण की योजना बणावै, उनपै हाथ चलावै। कोए उनका सामना न्ही कर सक्या, क्यूँके उनका भय देश-देश के सारे माणसां के मन म्ह समा ग्या था।
13 एस्तेर नै कह्या, "जै राजा नै मंजुर हो तो शूशन के यहूदियाँ नै आज कै बराबर कल भी करण का हुकम दिया जावै, अर हामान के दसो बेट्टे फाँसी के खम्भ्यां पै लटकाए जावै।"
17 यो अदार महिन्ने के तेरहवें दिन म्ह करया गया, अर चौदहवें दिन म्ह उननै आराम करकै भोज करया अर आनन्द का दिन ठैहराया।
26 इस कारण उन दिनां का नाम पूर शब्द तै पूरीम धरया गया। इस चिट्ठी की सारी बात्तां कै कारण, अर जो कुछ उननै इस बारै म्ह देख्या अर जो कुछ उनपै बीत्या था, उसकै कारण भी