नबी का दुखड़ा अर उसकी आस
1 उसके छो की छड़ी तै दुख भगाण आळा माणस मै ए सूं;
2 वो मन्नै ले जाकै उजियाळे म्ह न्ही, अंधियारे ए म्ह चलावै सै;
3 उसका हाथ दिन भर मेरे ए बिरुध्द उठदा रहवै सै।
21 पर मै यो याद करुँ सूं, इस करकै मन्नै आस सै:
22 हम मिट न्ही गए; या यहोवा की बड़ी दया का फळ सै, क्यूँके उसकी सारी दया अमर सै।
23 वो रोज सबेरै नई होन्दी रहवै सै; तेरी सच्चाई महान सै।
24 मेरे मन नै कह्या, "यहोवा मेरा हिस्सा सै, इस कारण मै उस म्ह आस राक्खूँगा।"
25 जो यहोवा की बाट देक्खै अर उसकै धोरै जावै सै, उनकै खात्तर यहोवा भला सै।
26 यहोवा तै उद्धार पाण की आस राखकै चुपचाप रहणा भला सै।