17 अर मेरे ताहीं मन तै उतारकै मेरी सलामती की आस जान्दी रही;
मै सुख-शान्ति भूल ग्या सूं;
18 इस करकै मन्नै अपणे आप तै कह्या, "मेरी ताकत खतम होगी,
अर मेरी आस जो यहोवा पै थी, वो टूटगी सै।"
19 मेरा दुख अर मारया-मारया फिरणा, मेरा नागदौना
अर जहर का पीणा याद कर!
20 मै उन्हे बात्तां नै सोचदा रहूँ सूं,
इसतै मेरा जी उखड्या जावै सै।