4 राजा नै मेरे तै पूच्छया, "फेर तू के माँग्गै सै?" फेर मन्नै अपणे दिल म्ह सुर्ग के परमेसवर तै प्रार्थना करकै, राजा तै कह्या; 8 अर सरकारी जंगळ के रुखाळे आसाप कै खात्तर भी इस मकसद तै चिट्ठी मेरे ताहीं दी जावै ताके वे मन्नै भवन तै लाग्गे होए राजगढ़ की कड़ियाँ कै खात्तर, अर शहरपनाह कै, अर उस घर कै खात्तर, जिस म्ह मै जाकै रहूँगा, लाकड़ी दे।" मेरे परमेसवर की दया की नजर मेरे पै थी, ज्यांतै राजा नै या बिनती कबूल कर ली।
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