1 मन की योजना माणस कै बस म्ह रहवै सै,
पर सही जवाब यहोवा की ओड़ तै होवै सै।
2 माणस का सारा चाल-चलण अपणी निगांह म्ह पवित्र ठहरै सै,
पर यहोवा मन नै तोल्लै सै।
3 अपणे काम्मां नै यहोवा पै छोड़ दे,
इसे तै तेरी योजना सिध्द होवैगी।
9 माणस मन म्ह अपणे राह पै विचार करै सै,
पर यहोवा ए उसके पैरां नै टिकावै सै।
25 इसा भी राह सै, जो माणस नै सीध्धा लाग्गै सै,
पर उसकै अन्त म्ह मौत ए मिलै सै।
33 चिट्ठी लिकाड़ी जावै तो सै,
पर उसका लिकड़णा यहोवा ए कै ओड़ तै होवै सै।