27 जो सम्भळ कै बोल्लै सै, वो ज्ञान्नी ठहरै सै;
अर जिसकी आत्मा शान्त रहवै सै, वोए समझ आळा माणस ठहरै सै।
28 मूर्ख भी जिब चुप रहवै सै, तो बुद्धिमान गिण्या जावै सै;
अर जो अपणा मुँह बन्द राक्खै वो समझ आळा गिण्या जावै सै।
27 जो सम्भळ कै बोल्लै सै, वो ज्ञान्नी ठहरै सै;
अर जिसकी आत्मा शान्त रहवै सै, वोए समझ आळा माणस ठहरै सै।
28 मूर्ख भी जिब चुप रहवै सै, तो बुद्धिमान गिण्या जावै सै;
अर जो अपणा मुँह बन्द राक्खै वो समझ आळा गिण्या जावै सै।
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