Pular para o conteúdo
Publicidade

नीतिवचन 18:2,4,6-8,13,20,21

2 मूर्ख का मन समझ की बात्तां म्ह न्ही लागदा,

वो बस अपणे मन की बात जाहिर करणा चावै सै।

4 माणसां के मुँह के वचन गहरा पाणी हो सै;

बुद्धि का चोवा बहन्दी होई धारा के जिसा सै।

6 बात बढ़ाण तै मूर्ख मुकद्दमा खड्या करै सै,

अर खुद नै मार खाण कै जोग्गा दिखावै सै।

7 मूर्ख का विनाश उसकी बात्तां तै होवै सै,

अर उसकी बात उसकै प्राण कै खात्तर फंदा होवै सै।

8 कानाफूसी करण आळे की बात सुवाद खाणे की ढाळ लाग्गै सै;

वे पेट म्ह हजम हो जावै सै।

13 जो बिना बात सुणे जवाब देवै सै, वो बेकूफ ठहरै सै,

अर उसका अनादर होवै सै।

20 माणस का पेट मुँह की बात्तां के फळ तै भरै सै,

अर बोलण तै जो कुछ उसनै मिलै सै, वो उसतै छिक्‍क जावै सै।

21 जीभ कै बस म्ह मरणा अर जीणा दोन्‍नु होवै सै,

अर जो उसनै काम म्ह लाणा जाणै सै, वो उसका फळ भोग्गैगा।

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.