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नीतिवचन 31:10,16,18,20,24,26

भली पत्नी

10 भली पत्नी कौण पाँ सकै सै?

क्यूँके उसका मोल तो मूँगों31:10 मूँगों मूँगा एक बेशकीमती रत्न सै तै बाध सै।

16 वा किसे खेत कै बारै म्ह सोच्‍चै सै

अर उसनै मोल ले लेवै सै; अर अपणी मेहनत तै अंगूर का बाग लगावै सै।

18 वो जाण ले सै के मेरा व्यापार फायदेमन्द सै।

वो देर रात ताहीं काम करै सै।

20 वा दीन के खात्तर मुट्ठी खोल्‍लै सै,

अर कंगालां नै सम्भाळण खात्तर अपणा हाथ बढ़ावै सै।

24 वा सूत के लत्ते बणा के बेच्‍चै सै;

अर व्यापारियाँ नै कमरबन्द देवै सै।

26 वा बुद्धि की बात बोल्‍लै सै,

अर उसके शब्द कृपा की शिक्षा के मुताबिक होवै सै।

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