2 तो ये जरूरी ए कि मण्डल़िया रे अगुवेया खे निर्दोष, एक ई लाड़िया रा लाड़ा, सब्रखोर, सुशील, आदरो जोगा, पराऊणचारी करने वाल़ा और सिखाणे रे निपुण ऊणा चाईयो। 3 से पियक्कड़ या मारपीट करने वाल़ा नि ओ, बल्कि नम्र और शान्त ओ और चगड़ा करने वाल़ा या लाल़ची नि ओ। 4 आपणे कअरो रा अच्छा इन्तजाम करने वाल़ा ओ और बाल-बच्चेया खे सारी गम्भीरता ते अनुशासनो रे राखणे वाल़ा ओ।
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