15 "जे तेरा कोई विश्वासी पाई तेरे खलाफ पाप करो, तो तेसखे कल्ले जे लई जाई की समजेया, जे से तेरी सुणोगा तो तैं आपणा विश्वासी पाई पायी ला। 16 जे से तेरी नि सुणोगा, तो तूँ आपू साथे, एकी-दुँईं जणे खे ओरी खे बी लई जा, ताकि ‘मूसे रा बिधानो रे मुताबिक हर एक गल्ला री गवाई, दो या तीन जणेया रे मुंओ ते पक्की कित्ती जाओ।’ 17 जे से तिना री पनि मानो, तो तूँ मण्डल़िया खे बोल, पर जे से मण्डल़िया री पनि सुणोगा, तो तूँ तेसखे दूजी जातिया रा और कर लणे वाल़ा जेड़ा समज।
18 "आऊँ तुसा खे सच्च लगी रा बोलणे कि जो कुछ तुसा तरतिया रे बानणा, से स्वर्गो रे बानेया जाणा और जो कुछ तुसा तरतिया रे खोलणा, से स्वर्गो रे खोलेया जाणा। 19 फेर आऊँ तुसा खे सच्च बोलूँआ कि जो कोई तरतिया रे दो जणे एक मन ऊई की तिजी खे माँगो, तो से मेरे स्वर्गिय पिते री तरफा ते, जो स्वर्गो रे ए, से तिना खे ऊई जाणा। 20 कऊँकि जेती दो या तीन जणे मेरे नाओं ते कट्ठे ओए, तेती आऊँ तिना बीचे ओऊँआ।"