6 हेरे वजे सी तुहुंं खुसी हवु, मानु जरुड़ी छे की हय काय दाहड़ा लग काय तरान दुख झेलनु पड़ र्यो; 7 ने जी हेरेसी छे की तुंद्रु पारख हवलु भुरसु, जे आकठा सी तय हवलो खत्तम हवण्या सना सी बी काही अदुस बेसको जरुड़ी छे, ईसु मसी देखता हवणे पर बड़ाय ने सेक-सींगार ने ईज्जतेन वजे बणे। 8 तुहुंं ईसु काजे कदी नी देख्या, तेबी तुहुंं हेरसी परम राखु। तुहुंं हय बी हीनाक नी देखु तेबी हेरे पर भुरसु करु। ने भुरसु करीन असा खुसी हवु ने मुरखायु ज्य बीयान सी बाहार ने सेक-सींगार सी भरला छे; 9 ने आपणा भुरसान दाहड़ीन फळ मतलब आत्मान छुटकारु जड़े।
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