42 "ए बास! कदी तु चाहे, ती जु दुखेन पीयालो मारे धड़े सी टाळ दे, बाकुन तेबी मारी मरजी नी, बाकुन तारीत मरजी पुरी हवणे दे।"
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42 "ए बास! कदी तु चाहे, ती जु दुखेन पीयालो मारे धड़े सी टाळ दे, बाकुन तेबी मारी मरजी नी, बाकुन तारीत मरजी पुरी हवणे दे।"
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