17 भुरसु करने वाळान जी सहलाणी रवसे की, चे मारे नाव सी भुतड़ान आत्मा काजे नीकाळसे ने नवली-नवली बुली बुलसे। 18 कदी चे घड़सा धर लेसे ने दवा बी पी लेसे तेबी तीनुक काय बी नुकसाण नी हवे ने चे मांदला पर हात मेकसे ने चे वारु हय जासे।"
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17 भुरसु करने वाळान जी सहलाणी रवसे की, चे मारे नाव सी भुतड़ान आत्मा काजे नीकाळसे ने नवली-नवली बुली बुलसे। 18 कदी चे घड़सा धर लेसे ने दवा बी पी लेसे तेबी तीनुक काय बी नुकसाण नी हवे ने चे मांदला पर हात मेकसे ने चे वारु हय जासे।"
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