4 तब मै उहां अक्ठी दूसर घोडवा के निकडत देखथो, जउन आगी के जसना लाल रंग के रथै, जउन ओखर उप्पर बइठे हर रथै उके अक्ठी बडा तलबार दय गय रहै अउ उके भुंइ लग सान्ति उठा लेय के आदेस दय गय रहै कि मनसे अक दूसर के बलि चढामै।
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4 तब मै उहां अक्ठी दूसर घोडवा के निकडत देखथो, जउन आगी के जसना लाल रंग के रथै, जउन ओखर उप्पर बइठे हर रथै उके अक्ठी बडा तलबार दय गय रहै अउ उके भुंइ लग सान्ति उठा लेय के आदेस दय गय रहै कि मनसे अक दूसर के बलि चढामै।