10 उन तो अपन-अपन समझ के जसना हइ सबरोज के जीवन के निता हमही तइयार करै के उदेस्य लग डांट फटकार करथै, पय भगवान हमर भलाई के निता असना करत हबै, काखे ऊ हमही अपन पवितर के भागीदारी बनामै चाहथै। 11 जउन टेम अनुसासित करे जथै, ऊ टेम अनुसासन खुसी बढिहा नेहको लगथै, बलुक ओखर लग दुख होथै, पय जउन कुछ होय ऊ जउन अनुसासन के अनुभव करथै, उनखर निता फेर नियाइपन धरमी सान्ति अउ बढिहा फल मिलथै।
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