यीसु अंजीर कर रूख के सरापथै
18 आने रोज बिहनेन यरुसलेम नगर छो यीसु वापिस आथै, ता उके भूख लगथै। 19 तब यीसु सडक के पाखा हे अंजीर कर अक्ठी रूख देखथै, ऊ ओखर लिघ्घो जथै, पय पत्तन के अलाबा अउ कुछु नेहको पाथै, ता यीसु रूख लग कथै, अब लग तोर हे कबहुन फडुहा नेहको लगही, अउ अंजीर के रूख हरबी झुराय गइस।
20 हइ देखके चेला चकित होथै अउ उन कथै, हइ अंजीर के रूख एतका हरबी कसके झुराय गइस।
21 यीसु उनही जबाब देथै, मै तुम्हर लग सही कथो, अगर तुम बिस्वास करथा अउ संका नेहको करथा, ता तुम न बलुक ऊ करिहा, जउन मै अंजीर के रूख लग करे हव, पय अगर हइ डोंगर लग कइहा, उठ अउ समुन्दर हे जाय गिर, ता ओसनेन हुइ जही। 22 अउ जउन कुछु तुम बिस्वास के संग बिनती हे मंगिहा, ऊ तुमही मिल जही।