धन्य बचन
3 धन्य हबै ऊ जउन मन के दीन हबै,
काखे स्वरग कर राज उनखर निता हबै।
4 धन्य हबै ऊ जउन सोक करथै,
काखे उनके सान्ति मिलही।
5 धन्य हबै ऊ जउन नम्र हबै,
काखे ऊ भुंइ के अधिकारी हुइहिन।
6 धन्य हबै ऊ जउन नियाइपन के भूखे अउ पियासे हबै,
काखे ऊ भरपूर करे जही।
7 धन्य हबै ऊ जउन दया करथै,
काखे ओखरो उप्पर दया करे जही।
8 धन्य हबै ऊ जेखर मन सुध्द हबै,
काखे ऊ भगवान के देखही।
9 धन्य हबै ऊ जउन मेल जोल करवाथै,
काखे ऊ भगवान कर टोरवा कहाही।
10 धन्य हबै ऊ जउन नियाइपन के कारन सताय जही,
काखे स्वरग कर राज उनखरै हबै।
11 धन्य हबै तुम, जब मनसे मोर चेला होय के कारन तुम्हर बेज्जती करही, तुमके तंग करही अउ कइनमेर के झूठ दोस लगइहिन। 12 हसा अउ मगन हुइहा, काखे तुम्हर निता स्वरग हे बोहत बडा इनाम हबै, तुम्हर पहिले ग्यानी मनसेन के उनही इहैमेर तंग करे रहिन।