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प्रेरित 16

25 आधलगभग आरथनकरतरययहा–भगवनन भजन रयहता, आरनरसमळरयहतो। 26 ओतरएकदम आयो, तक लन गयी, आरआखपलउगड़ी गया; आरआखधन उगड़ी पडो। 27 ियड़ा उठआरपलउगड़्समझ़ागयी, वलतलवपकआपनआपसखनगयु। 28 रदओवआयड़ीकयो, "आपनआपस़े, हकि आखी।"

29 तव ि़ी, आरपतसक आरओगव पड़्ा। 30 आरहरतकयो, सजजनो, उधखनकरतकरो?

31 कयो, "रबईशमसपर िकर, आरघरउध" 32 आरओकआरसब घरन नसरबवचन मवा। 33 ईन िनरु, आरआपसनससहवत बपतिो। 34 तव आपनघर ईन िनरओगव जन वकु, आरसब घरसहवत यहा–भगवपर िकरकर्‍ा।

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