1 आपसी जुवानीन दाहड़ा मा आपसा बनावने वाळा परमेश्वर क फोम राख, इना सी पेहल कि पीड़ान दाहड़ा आरु त्या साले आवे, जिनु मा तु म्हारो मन इनु मा नी लागतो। 2 इना सी पेहेल की दाहड़ो आरु विजाळो आरु तारागण आंधरा हुय जाय, आरु पानी पड़नेन वादळो पछो घेरु बनाय लेय; 3 उना दाहड़ा मा तारे घोरुन राखवाळिया कापने लागसे, आरु दात खानो चावनो छुड़ देसे, आरु खिड़कीम रयीन देखने वाळा डुळा आंधळा हुय जासे,
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