8 ओळतेन परमेश्वर नुह आरु ओका पुर्या से कयो, 9 "सोमळु, हांव तुमरे साते आरु तुमरे वाद मा जी तुमरी ओवलियाद होयसे, ओका सात मा वी वायदु बाधो; 10 आरु आखा जीवतला जीवो सी वी जे तुमरे साते छे काय चिल्ला काय पावन्या ढुरे काय कोळी क सब बनेले ढुरे, कोळी क जोतरा जिवजोनतु ढोन्ड्या सी निकोवला छे। 11 आरु हांव तुमरे साते आपसु यु वायदु बांधो कि आखा जिव ओळतेन जळ–प्रलय सी नष्ट नी होयसे: आरु कोळी क नाश कोरने क लिय ओळी जळ–प्रलय नी होयसे।"