24 हे न्यायी बास, हाव चाहतु छे कि जीनुक तु मखे देदु छे, जा हाव छे वा चाँ भी मार साथे रोवे, कि चाँ मारी ओको महिमा देखु जो तु मखे देदु छे, काहकि तु जगन उत्पत्ती छे पेहल मखे जु मोंग राख्यु।
24 हे न्यायी बास, हाव चाहतु छे कि जीनुक तु मखे देदु छे, जा हाव छे वा चाँ भी मार साथे रोवे, कि चाँ मारी ओको महिमा देखु जो तु मखे देदु छे, काहकि तु जगन उत्पत्ती छे पेहल मखे जु मोंग राख्यु।