3 आरू मानसे एक लखवा सी बीमार क चार मानसे ओको हुकलीन ईशुन साथे ली आश। 4 पुन जोत्यार चाँ गर्दीन कारण ईशुन चाँ नी पुचाय सक्यो, ती चे घर क उपर तिनान घरन नेड़ु ईशु हतु, खुल दिदा आरू चे इनाक उधार दिदा, ती खाटला पर लखवान बीमार पड़ रयु हतु, तीनाक लटकाड़ दिदा। 5 ईशु तेरू विश्वास देखीन तीन लखवा वावा कयो "ए पोर्या तारू पाप माफ होय गयु"
6 तव कोय शास्त्री चाँ बठ रया हता आपसा–आपसा मनमा विचार करणे लाग्या, 7 "यु मानुस काँ ओसो कयतो हतु? यु ते यहोवा भगवानन बुरा विचार करता छे! यहोवा भगवान क छुड़ीन आरू कुन पाप माफ कर सकता छे?"
8 ईशु तत्काल आपसी आत्मा मा जान लेदु, कि वो आपसा–आपसा मनमा विचार करने लाग्या, आरू तिनुक कयो, "तुमू आपसा–आपसा मनमा काँ विचार कर रया? 9 सहज काय छे? काय लखवा क बीमार छे यो कयनो कि थार पाप माप हयो, यो कयनो कि उठ आपसी खाटली हुचल आरू चाल पछु? 10 पुन तुमू ईशु क जान लेवु कि मानुस क पोर्या क धरती पर पाप माफ करने क भी हक छे।" त्यो लखवा क बीमार छे कयो, 11 "हाव तखो कयो, उठ, थार खाटली हुचलीन थारे घर जाती रोवे।"
12 त्यो उठयो, आरू तत्काल खाटली हुचलीन आखान क सामने चालीन जात रयो; इना पर आखा क आखा–बाकी हय गया, आरू यहोवा भगवान क बढ़ाई करीन कयनो लाग्यो, "हामु ओसो नी देख्या।"