विश्वासयोग्य नोकर और बेमान नोकर
45 येशू कलाँ, "विश्वासी और बुद्धिमान नोकर उ हो, जिहिहे ओकर मलिक्वा दोसुर नोकर-नोकर्नीनहे सम्हरना और खवैना जिम्मा देहे सेकत। 46 उ नोकर धन्य हो, जिहिहे मलिक्वा घुमके आई ते ओस्तेहेँ करत भेटाई। 47 जात्तिके, मै तुहुरिन्हे कहतुँ, ओकर हाँथेम ओकर मलिक्वा अपन सारा सम्पतिक जिम्मा दैदी। 48,49 यदि उ नोकर खराब रही और अपन मनमे सोँची कि ‘मोरिक मलिक्वा अइनामे बेर करी’ कहिके अपन संगेक नोकर और नोकर्नीनहे पिटे लागल। और ऊ मदुवनके संग जाके खाई-पिए लागल कलेसे, 50 उ नोकरके मलिक्वा असिन समयमे आपुगी। जब ऊ ओकर असरा नै करल रही। और असिन समयमे जोन उहिहे पता फेन नै रहिहिस। 51 तब ओकर मलिक्वा उहिहे कठोर दण्ड दि, और उहिहे कपटीनके बिच्चेम फेँकादी, जहाँ मनै रुइहीँ और कष्टमे दाँत किचकिचैहीँ!"