चिन्ता और फिक्री नै करना
25 "तबेकमारे मै तुहुरिन्हे कहतुँ, रोज ‘का खैबुँ, का पिबुँ’ कहिके जिअक लग और ‘का घल्बुँ’ कहिके अपन शरीरके लग चिन्ता जिन करो। पक्कै फेन जीवन खानासे धेउर और शरीर लुग्गाफाटासे धेउर किम्ती बा।
33 पर आघे तुहुरे अपन जीवनमे परमेश्वरके राजहे सक्कुहुनसे खास चिज बनाऊ। और एकथो धार्मिक जीवन जिना इच्छा धारो। तब यी सक्कु चिज तुहुरिन्हे मिलजाई।