22 हे लुगेनहोन,अपना अपना अदमी को असो अधीन रेस जसो प्रभु को. 23 क्युकी अदमी लुगेन को माथो हइ जसो की मसीह मंडली को माथो हइ अरु स्वयं ही आंग को उद्धारकर्ता हइ. 24 पर जसो मंडली मसीह को अधीन हइ वोसो ही लुगेन भी हर बात मे अपना अपना अदमी, सात मे रेस.
25 हे लोगहोन, अपनी अपनी लुगय से प्रेम रख जसो मसीह ने भी मंडली से प्रेम कर अपना आप खे ओका लिये दि दियो. 26 कि वोको वचन का वजेसे पानी से अच्छो करीखे पवित्र बनह्ये, 27 अरु वोखे एक असी तेजस्वी मंडली बनयखे अपना पास खडो कर्हे, जमे नीष्कलंक, नी झुरी नी कोय अरु असो चिज हय क्युकी पवित्र अरु नीर्दोस हय. 28 यो रंग अच्छो हइ कि लोग अपनी अपनी लुगय से अपनी आंग का जसो प्रेम रख. जो अपनी लुगय से प्रेम रखस हइ, व्हा अपनो आप से पिरेम रखस हइ. 29 क्युकि कोय ने कभी आंग से फरक नी रख्यो क्युकि ओको पाल्यो पोषण करस हइ, जसो मसीह भी मंडली को करस हइ. 30 येका लिये कि हम ओकी आंग को भाग हइ. 31 यो कारन इन्सान अपना माय बाप खे छोडी खे अपनी लुगय से मील्यो र्हियो, अरु वे दो एक जान हुया. 32 यो भेद बडो हइ, पर मी यो मसीह अरु मंडली, बारे मे बोलस हय. 33 पर तुम मे से हर एक अपनी लुगय से अपना सामने प्रेम रख, अरु लुगय भी अपनो लोग को डर माननु.स