यीशु सच्ची अंगूर कि बेल
1 सच्ची अंगूर कि बेल मी हइ. अरु मरो बाप किसान हइ. 2 जो डाली मरा मे हइ, अरु नी फले, ओखे उ काटी डालस हइ, अरु जो फलस हइ, ओखे उ छाटस हइ ताकि जादा फल्ये. 3 तुम तो उ वचनकरण जो मेने तुम से बोल्यो हइ, अच्छो हुये. 4 तुम मरा मे बन्या र्हेनु, अरु मी तुम मे जसी डाली अगर अंगूर कि बेल मे बनी नी ऱ्हिये ते अपना आप से नी फली सक्ये ओसो ही तुम भी अगर मरा मे बन्या नी र्हिये ते नी फली सक्ये.
5 मी अंगूर कि बेल हइ तुम डालीहोन हइ. जो मरा मे बन्यो र्हेस हइ, अरु मी ओमे, उ भोत फल फलस हइ, क्युकी मरासे अलग हुइखे तुम कुछ भी नी करी सक्ये. 6 अगर कोय मरा मे बन्यो नी र्हियेका ते वा डाली का जसा फेकी दियो जास, अरु सूखी जास हइ. अरु इन्सान उनखे बटोरीखे अंगार मे फेकी देस हइ, अरु वे जली जास हइ. 7 अगर तुम मरा मे बन्या र्हिये अरु मरी बातहोन तुम मे बनी र्हिये ते जो चाह्ये मागनू अरु उ तुमारा लिये हुइ जाये. 8 मरा बाप की महिमा येमे से होस हइ, कि तुम भोत सो फल लानु, तब तुम मरा सेवक ठैइऱ्यो.