पाच हजार दुन्याहोन खे खलानो
13 जब यीशु ने यहुन्ना का बारे मे सुन्यो, ते डोंगा पर चेडीखे व्हा से कोय सुनसान जगह पर, अकेला मे चली गयो. अरु दुन्या यो सुनीखे गाव-गाव से पयदल ओका पीछे हुये लीयो. 14 ओने डोंगा से नीकलीखे एक बडी गर्दी देखी, अरु उन पर दया अयगी, अरु ओने उनका बेमारहोन खे अच्छो कऱ्यो.
15 जब रात हुइ ते ओका सेवक होन ने ओका पास अयखे ओखे बोल्यो, "या तो सुनसान जगा हइ अरु देर हुये ऱ्ही हइ, अरु दुन्याहोन खे बिदा कऱ्यो जाये की वे बजार मे जयखे अपना लिये खानो मोल लाये."
16 यीशु ने सेवक होन से बोल्यो, की उनको जानो जरुरी नी हइ! तुम ही जयखे उनका लिये खानो ला
17 ओने ओकासे बोल्यो, "की हमारा पास पाच रोटी अरु दो मंछी खे छोडी खे अरु कुछ नी हइ."
18 यीशु ने बोल्यो, "उनखे मरा पास लिखे आ." 19 तब ओने दुन्याहोन खे घास पर बठन खे बोल्यो, अरु वे पाच रोटीहोन अरु दो मंछीहोन खे लीखे आ. अरु स्वर्ग का तरप देखीखे धन्यवाद बोल्यो अरु रोटीहोन खे तोडी-तोडीखे सेवक होन खे दी, अरु सेवक होन ने दुन्याहोन खे दी. 20 अरु सब खयखे मगम हुये गया, अरु ओने बचया हुया टुकडाहोन से भरी हुये बारा टोपली उठ्य. 21 अरु खानवाला बय अरु बच्चाहोन खे छोडी खे पाच हजार इन्सान का नजीकपास था.