17 पर जो ज्ञान उपर से आस हइ उ पहिले ते पवित्र होस हइ फिर मीलनसार, कोमल अरु पुरी शांती अरु दया अरु अच्छो फल से लाद्यो हुयो अरु पक्षपात अरु नीष्कपट ऱ्हेस हइ. 18 शांती प्रस्थापित करण आलो दुन्या कोही धर्मीक जिवन को फल मील्हे अगर ओखे शांती पुर्ण वातावरन मे बोयो गयो हइ.