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1 थिस्सलुनीकियों 4:3-7

HSB Hindi Standard Bible

3 परमेश्‍वर की यही इच्छा है कि तुम पवित्र बनो, अर्थात् व्यभिचार से दूर रहो, 4 और तुममें से प्रत्येक अपने-अपने पात्र को पवित्रता और आदर के साथ संभालना जाने, 5 और उन गैरयहूदियों के समान कामुकता में नहीं, जो परमेश्‍वर को नहीं जानते हैं। 6 इस बात में कोई अपने भाई के प्रति अपराध न करे और न उसका अनुचित लाभ उठाए क्योंकि इन सब बातों का बदला लेनेवाला प्रभु है, जैसा कि हमने तुम्हें पहले ही बताया और चिताया भी था। 7 परमेश्‍वर ने हमें अशुद्धता के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता के लिए बुलाया है।

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    3 परमेश्वर की इच्छा है कि तुम पवित्रता की स्थिति में रहो—तुम वेश्यागामी से अलग रहो; 4 कि तुममें से हर एक को अपने-अपने शरीर को पवित्रता तथा सम्मानपूर्वक संयमित रखने का ज्ञान हो, 5 कामुकता की अभिलाषा में अन्यजातियों के समान नहीं, जो परमेश्वर से अनजान हैं; 6 इस विषय में कोई भी सीमा उल्लंघन कर अपने साथी विश्वासी का शोषण न करे क्योंकि इन सब विषयों में स्वयं प्रभु बदला लेते हैं, जैसे हमने पहले ही यह स्पष्ट करते हुए तुम्हें गंभीर चेतावनी भी दी थी. 7 परमेश्वर ने हमारा बुलावा अपवित्रता के लिए नहीं परंतु पवित्र होने के लिए किया है.

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    3 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम पवित्र बनो4:3 पवित्र बनो: परमेश्वर की यह इच्छा या आज्ञा हैं कि आपको पवित्र होना चाहिए। अर्थात् व्यभिचार से बचे रहो, 4 और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र4:4 पात्र: कुछ अनुवादों में पात्र शब्द का प्रयोग पत्नी के लिए भी किया गया है। को प्राप्त करना जाने। 5 और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न अन्यजातियों के समान, जो परमेश्वर को नहीं जानतीं। 6 कि इस बात में कोई अपने भाई को न ठगे, और न उस पर दाँव चलाए, क्योंकि प्रभु इस सब बातों का पलटा लेनेवाला है; जैसा कि हमने पहले तुम से कहा, और चिताया भी था। (भज. 94:1) 7 क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्तु पवित्र होने के लिये बुलाया है।

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1 Tessalonicenses
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