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Ecc 8

ि, अधिी, और पकषप

1 िै? िअरबतसकतै? मनि उसकचमकै, और उसककठरतरहतै। 2 ैं कहतूँ ि परम्‍वर समशपथ रण आज3 मनटनें उतवलमत करिे; ोंि वह हतै, वहकरतै। 4 वचन अधिरपै, इसलिउससकह सकति करतै? 5 उसकआजलन करतवह िपति ें नहीं पड़ता, ोंि िमनउचिसमय और ियम नतै। 6 रतउपय्‍समय और ियम ै, यदयपि मनुःउसकिबहै। 7 जब नतनहीं ि ै, बतसकति वह कब ा? 8 ियक्‍ि अपनपर अधिनहीं ि उसरहे, और ििपर अधिै; समय िअवकनहीं िसकता, और करनों उनकबचसकतै। 9 ैंइन सब ों ै, और ें िहर पर अपनमन लगै; जब-जब मनसरपर अधिजमउसनअपनि ै।

10 िैंउन ्‍ों ै, पविरसें आते-े; अपननगर ें िगए जहाँ ्‍टतिकरते। यह यरै। 11 आजनहीं ी, इस रण मनों मन करनइचभररहतै। 12 करऔर बहसमय तक िरहे, िैं नतूँ ि परम्‍वर भय नतैं और उसकउपसिि ें भय चलतैं, उनकभला। 13 पर्‍भलनहीं और उसकिसमबढ़ सकेंे, ोंि वह परम्‍वर भय नहीं नता।

14 एक और यरपर घटत: ऐसधरजन ैं िें ्‍ों करनफल गनपड़तै, और ऐस्‍ैं िें धरिों भलों फल िलतै। ैं कहतूँ ि यह यरै। 15 तब ैंख-विसरा, ोंि ें मनिे-और आनमनऔर अचनहीं, ोंि परम्‍वर उसइस ें ितनििैं, उतनिउसकपरिरम ें यह आनउसकरहा।

16 जब ैंि ननऔर पर िों खनिअपनमन लगि मनिन-रगतरहतै, 17 तब ैंपरम्‍वर रतऔर ि मनउसनहीं समझ सकतिै। मनउसजनें ितनपरिरम करे, िउसएगा; और िितनकहि ैं समझतूँ, िउससमझ सका।

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