20 बड़े घर में केवल सोने-चाँदी ही के नहीं बल्कि लकड़ी और मिट्टी के पात्र भी होते हैं; कुछ आदर के तो कुछ अनादर के लिए। 21 इसलिए यदि कोई अपने आपको इनसे शुद्ध रखे, तो वह आदर का ऐसा पात्र ठहरेगा, जो पवित्र, स्वामी के लिए उपयोगी और हर भले कार्य के लिए तैयार होगा।
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