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Resultados da busca por "salvação"

26 resultados encontrados

16 "हे अंधे मार्गदर्शको, तुम पर

17हे मूर्खो और अंधो, बड़ा क्या है, सोना या सोने को पवित्र करनेवाला मंदिर?

18फिर तुम कहते हो, ‘जो

7मेरे सहायक के रूप में

8यहोवा की शरण लेना,

9यहोवा की शरण लेना,

18उसी दिन यहोवा ने अब्राम

19अर्थात् केनियों, कनिज्‍जियों, कदमोनियों,

20हित्तियों, परिज्‍जियों, रपाइयों,

2क्योंकि वे घास के समान

3यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर।

4यहोवा में मगन रह,

4यदि शासक का क्रोध तुझ

5मैंने संसार में एक बुराई देखी है जो शासक की भूल से उत्पन्‍न होती है :

6मूर्खों को कई उच्‍च स्थानों पर स्थापित किया जाता है, जबकि धनवान लोग निम्‍‍न स्थानों पर बैठते हैं।

16यबूसी, एमोरी, गिर्गाशी,

17हिव्वी, अर्की, सीनी,

18अर्वदी, समारी, और हमाती भी

4क्योंकि जो कोई परमेश्‍वर से

5संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जो यह विश्‍वास करता है कि यीशु ही परमेश्‍वर का पुत्र है।

6यह वही है जो जल

9"अतः तुम इस प्रकार प्रार्थना

10तेरा राज्य आए,

11हमारी दिन भर की रोटी

2तब मैंने जीवित परमेश्‍वर की

3"जब तक हम अपने परमेश्‍वर के दासों के माथों पर मुहर न लगा दें तब तक न पृथ्वी को, न समुद्र को और न ही पेड़ों को हानि पहुँचाना।"

4तब मैंने उनकी संख्या सुनी

4प्रभु में सदा आनंदित रहो;

5तुम्हारी शालीनता सब मनुष्यों पर प्रकट हो। प्रभु निकट है।

6किसी भी बात की चिंता

32तब यीशु ने उनसे कहा,"मैं

33क्योंकि परमेश्‍वर की रोटी वह है जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।"

34तब उन्होंने उससे कहा, "हे

4यह सुनकर यीशु ने कहा,"यह

5यीशु, मार्था और उसकी बहन और लाज़र से प्रेम रखता था।

6फिर जब उसने सुना कि

1मुझ प्रवर की ओर से

2हे प्रिय, मेरी प्रार्थना है कि जैसे तू आत्मिक उन्‍नति कर रहा है, वैसे ही सब बातों में उन्‍नति करे और स्वस्थ रहे।

3क्योंकि जब भाइयों ने आकर

13जो बातों को इधर-उधर करता

14जहाँ मार्गदर्शन नहीं होता, वहाँ प्रजा का पतन होता है,

15जो किसी अजनबी की जिम्मेदारी

1याकूब के साथ अपने-अपने घराने

2रूबेन, शिमोन, लेवी, यहूदा,

3इस्साकार, जबूलून, बिन्यामीन,

2हमारे परमेश्‍वर पिता और प्रभु

3धन्य है परमेश्‍वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जो दयालु पिता और समस्त शांति का परमेश्‍वर है।

4वह हमारे हर क्लेश में

1हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा, मैंने तेरी शरण ली है।

2ऐसा न हो कि वे

8वे इस्राएली, अर्थात् याकूब और

9रूबेन के पुत्र : हनोक, पल्लू, हेस्रोन, और कर्मी।

10शिमोन के पुत्र : यमूएल,

2उसी ने समुद्रों पर उसकी

3यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है?

4वह जिसके हाथ निर्दोष हैं

42तब मैंने उन्हें कूट कूटकर

43तूने मुझे प्रजा के विद्रोह से बचाया है;

44मेरा नाम सुनते ही वे

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