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Filipenses 2

3 स्वार्थ से या अहंकार से कुछ न करो, बल्कि दीनता से दूसरों को अपने से श्रेष्‍ठ समझो, 4 प्रत्येक व्यक्‍ति अपने हित का ही नहीं, बल्कि दूसरों के हित का भी ध्यान रखे।

मसीह की दीनता और महानता

5 तुममें वही स्वभाव हो जो मसीह यीशु में था,

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