सूखे हाथवाले मनुष्य का ठीक होना
1 यीशु फिर आराधनालय में गया। वहाँ एक मनुष्य था जिसका हाथ सूख गया था। 2 फरीसी उसकी ताक में थे कि देखें, वह सब्त के दिन उसको स्वस्थ करेगा या नहीं, जिससे वे उस पर दोष लगा सकें। 3 उसने उस सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा,"उठ, बीच में खड़ा हो जा!" 4 फिर उसने उनसे कहा,"क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण बचाना या मारना?" परंतु वे चुप रहे। 5 उसने उन सब को क्रोध से देखा और उनके मन की कठोरता पर दुःखी होकर उस मनुष्य से कहा,"अपना हाथ बढ़ा!" उसने बढ़ाया और उसका हाथ3:5 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "दूसरे हाथ के समान" लिखा है। फिर से ठीक हो गया।