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मरकुस रचित सुसमाचार 4

37 तब एक बड़आई और लहरें टकरलगीं, यहाँ तक ि अब ें भरनलगा। 38 परवह िछलें तकिलगकर रहा। उनोंउसजगऔर उससकहा, "ु, िंनहीं ि हम रहैं?" 39 उसनउठकर ाँऔर कहा,"ांा! थम ा!" और थम गई और बड़ांि गई40 तब उसनउनसकहा,"ों डरतो? ें अभि्‍नहीं?" 41 अतभयभगए और आपस ें कहनलगे, "आखियह ि और इसकआजनतैं?"

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