13 मैं इसलिए उनसे दृष्टांतों में बात करता हूँ, क्योंकि वे देखते हुए भी नहीं देखते और सुनते हुए भी नहीं सुनते, और न ही समझते हैं। 14 उनमें यशायाह की यह भविष्यवाणी पूरी होती है :
तुम सुनते तो रहोगे, परंतु नहीं समझोगे;
और तुम देखते तो रहोगे, परंतु तुम्हें सूझेगा नहीं।
15 क्योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है;
वे कानों से सुनना नहीं चाहते
और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली हैं।
कहीं ऐसा न हो कि
वे आँखों से देखें
और कानों से सुनें,
मन से समझें तथा फिरें,
और मैं उन्हें स्वस्थ करूँ।