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मत्ती रचित सुसमाचार 18

अपनिकरनरति यवह

15 "यदि िकरे, कर उसअकें समझा। यदि वह े, अपनिा; 16 परयदि वह े, एक जन अपना, ि हर ्‍ि गवों ुँ18:16 व्यवस्था 19:15 17 ियदि वह उनके, कलिकह; और यदि वह कलिे, वह िरयहऔर कर वसलनसमठहरे।

18 "ैं मससच कहतूँ, पर ाँवह वरें एगा, और पर वह वरें एगा। 19 ैं मसिकहतूँ ि यदि ममें जन पर एक मन कर ििषय पर ाँें, वह िओर वरें ै, उनकिी। 20 ोंि जहाँ पर इकटैं, वहाँ ैं उनकें ूँ।"

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