यीशु की हत्या का षड्यंत्र
1 ऐसा हुआ कि जब यीशु ये सब बातें कह चुका, तो उसने अपने शिष्यों से कहा, 2 "तुम जानते हो कि दो दिन के बाद फसह का पर्व है, और मनुष्य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाया जाएगा।"
3 उस समय मुख्य याजक26:3 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "और शास्त्री" लिखा है। और लोगों के धर्मवृद्ध, काइफा नामक महायाजक के आँगन में इकट्ठे हुए, 4 और वे मिलकर यीशु को छल से पकड़ने और मार डालने की योजना बनाने लगे; 5 परंतु उन्होंने कहा, "पर्व के समय नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोगों के बीच में उपद्रव हो जाए।"
बैतनिय्याह में यीशु का अभिषेक
6 जब यीशु बैतनिय्याह में शमौन कोढ़ी के घर पर था, 7 तो एक स्त्री संगमरमर के पात्र में बहुमूल्य इत्र लेकर उसके पास आई और जब वह भोजन करने बैठा था तो उसके सिर पर उंडेल दिया। 8 यह देखकर शिष्य नाराज़ हुए और कहने लगे, "यह बरबादी किस लिए? 9 इसे ऊँचे दाम में बेचकर कंगालों को पैसा दिया जा सकता था।" 10 यह जानकर यीशु ने उनसे कहा,"तुम इस स्त्री को क्यों तंग कर रहे हो? उसने तो मेरे लिए भला कार्य किया है; 11 क्योंकि कंगाल तो सदा तुम्हारे साथ रहते हैं, परंतु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा; 12 इसने मेरी देह पर यह इत्र उंडेलकर मेरे गाड़े जाने के लिए तैयारी की है। 13 मैं तुमसे सच कहता हूँ, समस्त संसार में जहाँ कहीं यह सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहाँ इस स्त्री ने जो किया उसका वर्णन भी उसकी स्मृति में किया जाएगा।"
14 तब उन बारहों में से एक ने, जो यहूदा इस्करियोती कहलाता था, मुख्य याजकों के पास जाकर 15 कहा, "यदि मैं उसे तुम्हारे हाथों पकड़वा दूँ तो तुम मुझे क्या दोगे?" तब उन्होंने उसे चाँदी के तीस सिक्के तौलकर दिए। 16 उस समय से वह उसे पकड़वाने का अवसर ढूँढ़ने लगा।
फसह भोज की तैयारी
17 अख़मीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, शिष्य यीशु के पास आकर कहने लगे, "तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिए फसह का भोज खाने की तैयारी करें?" 18 उसने कहा,"नगर में अमुक व्यक्ति के पास जाओ और उससे कहो कि गुरु कहता है, ‘मेरा समय निकट है; मैं अपने शिष्यों के साथ तेरे यहाँ फसह का पर्व मनाऊँगा।’ " 19 अतः जैसा यीशु ने उन्हें निर्देश दिया था, शिष्यों ने वैसा ही किया और फसह का भोज तैयार किया।
फसह भोज पर विश्वासघाती
20 संध्या होने पर वह बारहों के साथ भोजन करने बैठा। 21 जब वे भोजन कर रहे थे तो उसने कहा,"मैं तुमसे सच कहता हूँ कि तुममें से एक मुझे पकड़वाएगा।" 22 उन पर बड़ी उदासी छा गई और वे एक-एक करके उससे पूछने लगे, "प्रभु, क्या वह मैं हूँ?" 23 इस पर उसने कहा,"जिसने मेरे साथ थाली में हाथ डाला है, वही मुझे पकड़वाएगा। 24 मनुष्य का पुत्र तो जाता ही है जैसा उसके विषय में लिखा है, परंतु हाय उस मनुष्य पर जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है। यदि उस मनुष्य का जन्म ही न होता तो उसके लिए अच्छा था।" 25 इस पर उसके पकड़वानेवाले यहूदा ने कहा, "हे रब्बी, क्या वह मैं हूँ?" यीशु ने उससे कहा,"तूने कह दिया।"
प्रभु-भोज
26 जब वे भोजन कर रहे थे तो यीशु ने रोटी ली और आशिष माँगकर तोड़ी और शिष्यों को देकर कहा,"लो, खाओ; यह मेरी देह है।" 27 फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद दिया और उन्हें देकर कहा,"तुम सब इसमें से पीओ, 28 क्योंकि यह26:28 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "नई" लिखा है।वाचा का मेरा वह लहू है जो बहुतों के पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।