9 जैसे तेल और इत्र मन को आनंदित करते हैं,
वैसे ही मित्र के हृदय से निकली
मनोहर सम्मति भी मन को आनंदित करती है।
10 अपने मित्र और अपने पिता के मित्र को न त्यागना,
और अपनी विपत्ति के समय अपने भाई के घर न जाना;
दूर रहनेवाले भाई की अपेक्षा निकट रहनेवाला पड़ोसी उत्तम है।