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Provérbios 30

आगवचन

1 आगरभवशवचन

उस ईतएल और उक्‍‍यह कह:

2 ि्‍चय ैं मनों ें सब अधििूँ

और झमें मनसमझ नहीं।

3 ैंि ्‍ै,

और परमपवििै।

4 वरें चढ़कर िउतर आया?

अपनें िसनबटरखै?

समवस्‍ें िसनाँिै?

िसनिििै?

नति उसकै,

और उसकै?

5 परम्‍वर एक-एक वचन ै;

परम्‍वर शरण ैं

उनकिवह ठहरै।

6 उसकवचनों ें ,

कहीं ऐसि वह ाँ

और ठहरे।

7 ैंझसवर ाँैं;

मरनपहलउनें इनककर :

8 और झसकर े;

िधन कर और धनबना।

रतििजन िकर

9 कहीं ऐसि बहअधि

और ैं इनककरककहूँ,

"यहै?"

ैं घटें पड़कर करूँ

और अपनपरम्‍वर पर कललगँ।

10 िउसकगलकरना,

ऐसि वह

और

11 ऐसैं अपनिैं

और अपनधननहीं कहते।

12 ऐसैं अपन्‍ि ें ैं,

परउनकनहीं ै।

13 ऐसैं, ो, उनकें घमभररहतैं!

और उनकौंें चढ़रहतैं!

14 ऐसैं िनकाँतलवसम

और ें िों समैं

ि पर ों

और मनों ें दरिों िें।

15 ोंिाँ ैं।

"े! और े!" कहतरहतैं,

वसैं ्‍नहीं ीं,

बलि ैं कभ"बस" नहीं कहतीं :

16 अध, ाँ, ि कभजल ्‍नहीं ी,

और आग कभ"बस" नहीं कहती।

17 अपनिउड़ै,

और आजनननतै,

उस तरचकर िेंे,

और िबच्‍े।

18 ें समझ परैं,

बलि ैं िें ैं समझ नहीं सकत:

19 आकें उक,

चटपर सर,

समें जह,

और वत

20 यभिियह :

वह कर अपनुँोंछती, और कहतै,

"ैंनहीं िै।"

21 ें ैं िनसाँपतै,

बलि ैं िें वह सह नहीं सकत:

22 बन ा,

भरपजन करना,

23 ि्‍ा,

और अपनिा।

24 पर ऐसैं ैं,

िअति िैं :

25 ींिाँ बलवनहीं ैं, पर

मकें अपनजन-वसबटरतैं।

26 ि्‍शक्‍िनहीं े,

िअपनघर चटों ें बनैं।

27 ििों नहीं ा,

िसब सब दल ाँधकर चलतैं।

28 िपकलपकड़सकतै,

िवह जभवनों ें रहतै।

29 ऐसैं िनकमनहर ै,

बलि ैं चलतमनहर लगतैं :

30 िंसब पशें शक्‍ि

और िमननहीं हटता,

31 अकड़कर चलतरगा,

बकरऔर अपनआगचलता।

32 यदि अपनबड़करनखतो,

षडरच

अपनुँपर रख

33 मथनमकखन,

और मरड़नलहिकलतै,

भड़क

झगड़उतपन्‍ै।

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