यिर्मयाह की प्रार्थना
19 हे यहोवा, हे मेरे बल और दृढ़ गढ़, संकट के समय मेरे शरणस्थान, जाति-जाति के लोग पृथ्वी की चारों ओर से तेरे पास आकर कहेंगे, "निश्चय हमारे पुरखा झूठी, व्यर्थ और निष्फल वस्तुओं को अपनाते आए हैं। (रोम. 1:25)
19 हे यहोवा, हे मेरे बल और दृढ़ गढ़, संकट के समय मेरे शरणस्थान, जाति-जाति के लोग पृथ्वी की चारों ओर से तेरे पास आकर कहेंगे, "निश्चय हमारे पुरखा झूठी, व्यर्थ और निष्फल वस्तुओं को अपनाते आए हैं। (रोम. 1:25)
19 याहवेह, मेरे बल तथा मेरे अजेयगढ़,
संकट की स्थिति में मेरे आश्रय,
पृथ्वी के चारों ओर से चलकर
राष्ट्र आपके निकट आकर यह स्वीकार करेंगे,
"हमारे पूर्वजों ने इस निज भाग में असत्य,
व्यर्थ तथा निरर्थकता के सिवा और कुछ भी प्राप्त नहीं किया है.
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