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यिर्मयाह 51

दण

1 यहयह कहतै, ैं और बकरहनों िएक करनचला; 2 और ैं ऐसों ूँउसकफटक-फटककर उड़ा ेंे, और इस ि उसकनसकरेंे; और िपति िों ओर उसकिोंे। 3 धनिऔर अपनिलम पहनैं धनधनचढ़ाउठे; उसकजवों मलतकरना; उसकसतकरो। 4 कसदिों ें मरऔर उसकसडों ें ििें51:4 ििेंे: वह उकउड़ेा: अरवक उनकिे- (ि.51:3) - उसकसडों पर मरऔर ििेंअरसडों पर5 ोंि, यदयपि इसएल और यह, इसएल पविििों भरपगए ैं, उनकपरमवर, यहउनकनहीं िा।

6 "ें ो, अपना-अपनबच! उसकअधरें कर ि; ोंि यह यहबदलसमय ै, वह उसकबदलपर ै। (रका. 18:4) 7 यहें कटा, िससमतवे; ि-ि ों उसकखमधें िा, इस रण वलगए(रका. 14:8, रका. 17:2-4, रका. 18:3) 8 अचनक गई और गई ै। उसकिय-हकरो! उसकों िबलसऔषधि ; समभव वह सके। (रका. 14:8, रका. 18:2) 9 हम इलकरते, परनवह नहीं इसलिआओ, हम उसकतजकर अपने-अपनचलँ; ोंि उस पर ििणय आकवरनवरतक पहुँगयै। (रका. 18:5) 10 यहहमिकतरगट िैं; अतआओ, हम िें अपनपरमवर यहवरणन करें।

11 "ों करो! ें रहो! ोंि यहमन उभै, उसनकरनकलपनै, ोंि यहअरउसकमनियहबदल12 शहरपनिझणखड़ा करो; बहपहर; लगों ; ोंि यहरहनों िकहा, वह अब करनपर वरनिै। 13 बहजलशयों बसऔर बहभणरखनी, अनगया, पहुँगई ै। (रका. 17:1,15) 14 यहअपनशपथ ै, ि िचय ैं झकििों समअनगिनत मनों भर ूँा, और िललकेंे।

परमवर ि भजन

15 "उसअपनमरबना, और जगत अपनि ििा; और आकअपनरवणतिै। 16 जब वह लततब आकें जल बड़ा शबै, वह हरउठै। वह वरििजलबना, और अपनभणें पवन िआतै। 17 सब मनपशसरनरहिै; सब ों अपनरतों रण लजिपड़ेा; ोंि उनकरतें ैं, और उनकाँनहीं चलती। 18 यरऔर ठटै; जब उनकिसमय आएगा, तब ोंी। 19 परनिै, वह उनकसमनहीं, वह सब बनै, और इसएल उसकिै; उसकयहै।

परमवर फरस

20 "फरसऔर िहथिठहरगयै; ैं ि-ि ितर-बितर करूँा; और य-रकरूँा। 21 ैं सवसम़ों कड़े-कड़े करूँा; 22 रथसमरथ कड़े-कड़े करूँा; ैं ों कड़े-कड़े करूँा; ैं ़े और लडों कड़े-कड़े करूँा, और जवऔर जवों ैं कड़े-कड़े करूँा; 23 ैं ़-बकरिों समचरवकड़े-कड़े करूँा; ैं िऔर उसक़े ों कड़े-कड़े करूँा; अधिपतिों और िों ैं कड़े-कड़े करूँा।

उज

24 "ैं और कसदिों उन सब इयों बदलूँा, उनोंों मनिें ै; यहयहै।

25 "करनपहिसकै, यहयह ि ैं िूँ और बढ़ाकर ाँों पर ूँऔर जलपहबना। (रका. 8:8) 26 घर िपतथर ेंे, और ींिे, ोंि सदउजरहा, यहयहै।

27 "ें झणखड़ा करो, ि-ि ें नरसिंूँो; उसकिि-ि करो; अर, िऔर अशकनज मक ों उसकि, उसकिपति ठहर; ़ों िखरवििों समअनगिनत चढ़ा आओ28 उसकििों करो; उनकअधिपतिों सब िों सहिऔर उस करो। 29 यहिि वह ऐसउजकरि उसमें रहे; इसलिाँपतऔर ुःि30 रवगढ़ों ें रहकर लडइनकरतैं, उनकरतरहै; और यह खकर ि उनकससों ें आग लग गई बन गए ैं; उसकटकों ें़े ़े गए ैं। 31 एक हरकसरहरकऔर एक समसरसमिलनऔर यह समि़ेि नगर ों ओर िगयै; 32 और शतवश ें गए ैं, गए, और घबरउठैं। 33 ोंि इसएल परमवर, यहयह कहतै: ाँवतसमय खलिसमै, ़े िों ें उसककटनसमय आएगा।"

34 "नबकदनसर िा, ा; उसनबरतन समकर िा, उसनमगरमचसमिगल िै; और िजन नकर अपनझसभर िै, उसनजबरन ििै।" 35 िरहनकही, "उपदरव पर और शरपर ै, वह पर पलट " और यरशलकही, "ें हतकसदिों रहनों पर लगे।"

परमवर इसएल सहयतकर

36 इसलियहकहतै, "ैं कददमलड़ूँऔर बदलूँा। ैं उसकऔर उसकों ूँा; (रका. 16:12) 37 और खणडहर, और दड़ों ससा; और उसखकर चकिोंऔर बजे, और उसमें रहा।

38 "एक ऐसगरजेंऔर े, िंिंबचआहपर करतैं। 39 परनजब जब उतिों, तब ैं करकउनें ऐसमतवकरूँा, ि लसकर सदींें पड़ेंऔर कभेंे, यहयहै। 40 ैं उनको, ़ों बचों, और ़ों और बकरों समकरूँा।

पतन दश

41 "शक, िसकरशपर िगया? वह पकड़ा गया? िों नसगयै? 42 ऊपर समचढआयै, वह उसकबहलहरों ें गयै। 43 उसकनगर उजडगए, उसकिजन और िजल गयै, उसमें मननहीं रहता, और उससकर आदमनहीं चलता। 44 ैं ें दणूँा, और उसनिगल िै, वह उसकुँउगलवा। िों िउसकओर ाँाँचलेंे; शहरपनिएगी। 45 रजा, उसमें िकल आओ! अपने-अपनयहभडबच51:45 अपने-अपन.... बच: बचो। परमवर ें ि कषों बच ँ। ! (2 ि. 6:17) 46 जब उडउस ें , तब मन घबर; और उडचरपर एगउससडरना: उसकएक वरएक और उडआएगी, तब उसकसरवरें एक और उडआएगी, और उस ें उपदरव ा, और एक िसरिा।

47 "इसलि, िआतैं जब ैं रतों पर दणआजकरूँा; उस ों ुँएगा, और उसकसब उसें पड़े रहेंे। 48 तब वरऔर िपर जयजयककरेंे; ोंि उततर िकरनउस पर चढ़ाकरेंे, यहयहै। (रका. 18:20) 49 इसएल ों ा, उसें े। (रका. 18:24)

बनयहिों परमवर सन

50 "तलवबचं, ो, खड़े मत रहो! यहमरण करो, और यरशलि ो: 51 हम ैं, ोंि हमनअपनमधर51:51 अपनमधरै: यह ििों अनियवहअभिकथन अतिि यह कषा।; यहपविभवन ें िधरआए ैं, इस रण हम लजिैं।’

52 "इसलिो, यहयह ै, ऐसिआनैं ि ैं उसकरतों पर दणूँा, और उसकें यल कर करहतरहेंे। 53 ऐसबन ि आकें करऔर उसकगढऔर िँ, ैं उसकरनिे, ों ूँा, यहयह ै।

ि

54 "िहट शबपडै! कसदिों सतबड़ा हल ै। 55 ोंि यहकर रहऔर उसकबड़े हल बनकर रहै। इससउनकहल महगर ै। 56 पर करनचढआए ैं, और उसकरवपकड़े गए ैं और उनकधनगए; ोंि यहबदलपरमवर ै, वह अवशबदला। 57 ैं उसकिों, िों, अधिपतिों, रईसों, और रवों ऐसमतवकरूँि सदींें पड़ेंऔर िेंे, यहा, िसकिै, उसकयहै।

58 "यहयह कहतै, ़ी शहरपनींएगी, और उसकटक आग लगकर जले। और उसमें य-रों परिरम यरठहरा, और िों परिरम आग एगऔर थक े।"

िमयसन

59 यहिदकिवरें जब उसकसरगया, िऔर महसऔर जभवन अधिा, 60 तब िमयभवियदवकउसकें बतअरसब ें पर पडिपति िषय िैं, उनें िमयतक ें ििा। 61 िमयसरकहा, "जब ें पहुँे, तब अवशसब वचन पढा, 62 और यह कहना, यहइस िषय ें यह कहि ैं इसऐसिूँि इसमें मन, पशु, रहा, वरनयह सदउजपड़ा रहा।’ 63 और जब इस तक पढे, तब इसएक पतथर ाँधकर फरमहनद ें ेंा, 64 और यह कहना, इस रकएगऔर ैं उस पर ऐसिपति ूँि वह िकभउठऔर थकरहेंे।’"

यहाँ तक िमयवचन ैं। (रका. 18:21)

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