कुम्हार और मिट्टी
1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, "उठकर कुम्हार के घर जा, 2 और वहाँ मैं तुझे अपने वचन सुनाऊँगा।" 3 इसलिए मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 4 जो मिट्टी का बर्तन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बर्तन अपनी समझ के अनुसार बना दिया।
5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, 6 "हे इस्राएल के घराने, यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार के समान तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो18:6 तुम भी मेरे हाथ में हो: कोई पात्र टूट जाता था तो कुम्हार उसे फेंकता नहीं था। वह उसे पीसकर फिर से चाक पर रखता था और नये सिरे से उस पर काम करके मनोवांछित रूप प्रदान करता था। । (रोम. 9:21)