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यिर्मयाह 20

िमयिियत

14 िवह ििसमें ैं उतपन! ििजनिवह धनो! 15 िवह जन िसनियह समकर उसकबहआननििि लडउतपनै। 16 उस जन दशउन नगरों िें यहिदयिा; उससविहट और पहर ललकिकरे, 17 ोंि उसनगरें ि गरशय कबी, और ैं उसें सदपड़ा रहता। 18 ैं ों उतऔर गनिजनऔर ि अपनवन ें परिरम और ुःूँ, और अपनिमधरें यतकरूँ?

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