4 उसमें लिखा था: "जितने लोगों को मैंने यरूशलेम से बन्दी करके बाबेल में पहुँचवा दिया है29:4 यरूशलेम से बन्दी करके बाबेल में पहुँचवा दिया है: उनका निर्वासन उन्हीं की भलाई के निमित्त परमेश्वर का काम था। उन्हें उसका पूरा लाभ उठाकर धनोपार्जन करना और अपना मान-सम्मान बनाना था।, उन सभी से इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यह कहता है। 5 घर बनाकर उनमें बस जाओ; बारियाँ लगाकर उनके फल खाओ। 6 ब्याह करके बेटे-बेटियाँ जन्माओ; और अपने बेटों के लिये स्त्रियाँ ब्याह लो और अपनी बेटियाँ पुरुषों को ब्याह दो, कि वे भी बेटे-बेटियाँ जन्माएँ; और वहाँ घटो नहीं वरन् बढ़ते जाओ। 7 परन्तु जिस नगर में मैंने तुम को बन्दी कराके भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न किया करो, और उसके हित के लिये यहोवा से प्रार्थना किया करो। क्योंकि उसके कुशल से तुम भी कुशल के साथ रहोगे।
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यिर्मयाह 29:4-7
IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019
Em outras traduções
- OHSS Hindi Contemporary Version
4 सभी बंदियों के लिए, जिन्हें मैंने येरूशलेम से बाबेल में बंधुआई में भेजा है, सेनाओं के याहवेह, इस्राएल के परमेश्वर का संदेश यह है: 5 "आवासों का निर्माण करो तथा उनमें निवास करो; वाटिकाएं रोपित करो तथा उनके उत्पाद का उपभोग करो. 6 विवाह करो और पुत्र-पुत्रियों के जनक हो जाओ; तब अपने पुत्रों के लिए पत्नियां ले आओ तथा अपनी पुत्रियों का विवाह कर उन्हें विदा करो, कि वे संतान पैदा करें-उनका बढ़ना ही होता रहे, कमी नहीं. 7 जिस नगर में मैंने तुम्हें बंदी बनाकर रखा है, तुम उस नगर के हित का यत्न करते रहना. उसकी ओर से तुम याहवेह से बिनती भी करते रहना, क्योंकि उस नगर की समृद्धि में ही तुम्हारा हित निहित होगा."
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