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1 समुएल 27

ििों ऊद

1 और ऊद अपनिें कहि अब ैं िििऊल हलूँा, तब िइससहतर और नहीं ि ैं ़िििों सर और ऊल उमकर बनइसईल सरहदों ें िनहीं ूँा, ूँ ैं उसकबच ा। 2 इसलिऊद उठऔर अपन: जवों कर दशम’ओक अकगया। 3 और ऊद उसकें अकअपनअपऩानदसमरहनलगऔर ऊद उसकों िाँ ा’यजर’एलअखअम और करिअबीं। 4 और ऊल बर िि ऊद गया, तब उस िकभउसकतली। 5 और ऊद अककहा, "ि अगर पर करम नजउस शहरों ें कहीं जगह िि ैं वहाँ बसूँ, ़ािउस सलतनत ें ूँ रहें?" 6 इसलिअकउस ििउसिइसलििआज ितक यहदशों ै। 7 और ऊद ़िििों सर ें एक बरस और महतक रहा। 8 और ऊद और उसकों कर जसिों और जज़ीरयों और 'अम़िों पर हमलिूँि वह ि िहद तक उस सर िंे। 9 और ऊद उस सर तबकर और 'औरत मरि़ि़ा और उनकबकरिाँ और और गधऔर और कपड़े कर और अकगया। 10 अका, "ि आज िधर ी, ऊद कहा, यहदखिऔर यरहमिों दखिऔर ़ीिों दखिनमें।" 11 और ऊद उन ें एक मर'औरत ़िबचकर ें नहीं और कहति "कहीं वह हमहक़ीें, और कह ें ि ऊद ऐसऐसिऔर जब वह ़िििों ें बसै, तब उसकयहीं तऱा रहा, ै।" 12 और अकऊद यक़ीकर कहा, "ि उसनअपनइसईल अपनतरफकमनफरत िइसलिअब हमयह ़ािरहा।"

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