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1 समुएल 29

1 और ़ििअपनलशकर अफ़ीें जमा' करनलगऔर इसईलउस चशनजयजर’एल ें ़े2 और ़िििों उमरकड़ों और हज़ाों आगआगचल रहऔर ऊद अपनों अकरहा। 3 तब ़ििअमों कहा, "इन 'इबिों यहाँ ै?" अक़ििअमों कह"यह इसईल दशऊल ़ािऊद नहीं इतनिों बलि इतनबरसों और ैंजब वह आयआज ितक उस ें नहीं ?" 4 ि़िििउससऔर ़ििउससकहा, इस शख़्ि वह अपनजगह उसकिठहरपस , उसहमपर ऐसि ें वह हम़ािूँि वह अपनआक़ा करा? इन ों िों नहीं? 5 यह वहऊद नहीं िसकें उनोंचतवक़्कर एक सरकहि "ऊल हज़ाों पर ऊद ों ा?" 6 तब अकऊद कर उससकहा, "़ुवनहयसम ि सचऔर नजें आनलशकर ें अचूँि ैंििआयआज ितक ें नहीं यह िनहीं हते। 7 इसलिअब कर सलमत चलि ़िििों।" 8 ऊद अककहा, "िैंिै? और जब ैं मनूँ तब आज ितक ें ैं अपनिदशमनों करनँ।" 9 अकऊद जवि"ैं नतूँ ि नजें ़ुितरह ़िििकहि वह हमि10 इसलिअब बह सवअपनआक़ा ़ािों कर यहाँ आए ैं उठनऔर बह सवउठशनरवा।" 11 इसलिऊद अपनों तडउठि बह रवकर ़िििों और ़िियजर’एल चलगए

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