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यसायाह 23

िएक

1 ें नबवत तरसजह़ो, करूँि वह उजडगया, वहाँ घर और ़िजगह नहीं! िउनकबर पहुँै। 2 ििों, िनकगरों समनदर आतैं कर िै, ़ारहो। 3 समनदर ' और दरिा-ए-नसल उसकआमदनी, तब वह ़ौों िरत बना। 4 ा, शरमा, ूँि समनदर कहै, "समनदर गढ़ी कहा, दऱिनहीं लगा, और ैंबचनहीं जने; ैं जवों नहीं लती, और ुँिों परवरिनहीं करतूँ।" 5 जब अहल ियह बर पहुँी, वह बर बहमगोंे। 6 ििो, ़ा़ातरसचल7 यह दमबसै, िसकहसपहलै? उसाँउसैं ि परदें रहे। 8 ियह ़िाँबख़्िसकगर 'उमरऔर िसकििभर 'इज़्तदैं। 9 रबउल अफइरिि हशमत घमणहलकरऔर िभर इज़्तदों करे। 10 ़्तर तरसदरिा-ए-नतरह अपनसरजपर अब बऩी नहीं रहा। 11 उसनसमनदर पर अपनबढ़ाा, उसनममलकतों ििा; ़ुवनकनहकें िि उसक़िे' ििँ। 12 और उसनकहा, "मजुँी, ़्तर ा, िकभघमणकरी; उठ ़िें चला, वहाँ िा।" 13 कसदिों ! यह ़ौी; असउसरहनों िठहरा। उनोंअपनबनउनोंउसकमहल ़ारत िऔर उसिा। 14 तरसजह़ों करूँि ़िा' उज़ा गया। 15 और उस वक़्ूँ ि िदशिों ि़, सततर बरस तक एगा; और सततर बरस लत ़ाििी। 16 ़ािगई ै, बरबत उठऔर शहर ें िकर और बहें ि करें। 17 और सततर बरस ूँ ि ़ुवनबर ा, और वह उजरत पर एगऔर इस पर तमममलकतों बदककरी। 18 िउसकिरत और उसकउजरत ़ुवनिदस और उसक़ीिएगऔर जमा' रहबलि उसकिरत िउनकिा, ़ुवनमनरहतैं ि कर ों और नफ़ीपहने।

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