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यसायाह 64

1 ि आसम़े और उतर आए ि मनपहलरज़िँ। 2 ितरह आग िों जलऔर आग रति ़ाि़ों ें मशहऔर ़ौें मनें लरज़ाँ ों। 3 िवक़्बड़े ििनकहम तज़िे, उतर आयऔर पहमनाँगए4 ूँि ू' िा, ितक पहुँऔर ों िऐस़ुा, अपनइनि़ाकरनिकर ि5 उससिलत़ुसदकरतै, और उनसों ें रखतैं; , बनूँि हम िा, और दत तक उसें रहे; हम नजे? 6 और हम सब सब ऐसैं और हमतमरसतब़ी ितरह ै। और हम सब पततरह मलैं, और हमबदकिरदतरह हम उड़ा ै। 7 और नहीं े, अपनआपकआमकरि िपटरहे; ूँि हमबदकिरदवजह हम िरहऔर हम िघला। 8 ़ुवन, हमै; हम िऔर हमै, और हम सब सब दसतकैं। 9 ़ुवन, बनऔर बदकिरदहमतक रख; , हम िनत करतैं, हम सब ैं। 10 शहर बन गए, िनसऔर शलै। 11 हम़ुशनमकििसमें हमइबदत करते, आग जलगयऔर हमउम़ें बरगईं। 12 ़ुवन, इस पर अपनआप ा? ़ारहऔर हम ूँ बदहकरा?

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